18 October 2017

WISDOM

  रावण  ने   कुटनीतिक  चाल  चली  -- बोला    --- अंगद  ! जिस  राम  ने  तेरे  पिता  को  मारा  ,  तू  उन्ही  की  सहायता  कर  रहा  है  l  मेरे मित्र  का  पुत्र   होकर  भी  तू  मुझसे  वैर कर  रहा  है  l  '
  अंगद  हँसा  और  बोला  ---- " रावण !  अन्यायी  से  लड़ना  और उसे  मारना  ही  सच्चा  धर्म  है  l  चाहे  वह  मेरा  पिता  हो   अथवा  आप  ही  क्यों  न  हों  l "
  अंगद  के  ऐसे  तेजस्वी  शब्द  सुनकर   रावण  को  उत्तर    देते  न  बना  l
   ' सम्बन्ध  नहीं ,  नीति  और  न्याय  का  पक्ष   ही  वरेण्य  है  l  :                                                                   



16 October 2017

WISDOM ------ जीवन के प्रति सकारात्मक द्रष्टिकोण रखें

    यदि  कोई  अपने  जीवन  में  कुछ  करने  की  ठान  ले ,  तो  उम्र  उसके  कार्य  में  बाधा  नहीं  बनती   और  शरीर  की  उर्जा  उसके  कार्य  में  रूकावट  नहीं  डालती   क्योंकि  उसका  निश्चय  मन  से  होता  है  , मन  की  शक्ति  से  होता  है  l  इसलिए  हर  रूकावट  को , हर  मुश्किल  व  परेशानी  को   उसके  आगे  झुकने  के  लिए  मजबूर  होना  पड़ता  है  l  इसी  मन  की  शक्ति  के  कारण   लियोनार्डो   दि  विन्ची  ने   अपनी  प्रसिद्ध  पेंटिंग   ' मोनालिसा '  51  साल  की  उम्र  में  बनाई  और  यह  उनके  जीवन  में  सबसे  अधिक  प्रशंसित  हुई  l
                 इसी  प्रकार  प्रखर  व्यक्तित्व  नेल्सन  मंडेला   अपने  जीवन  में  लम्बा   संघर्ष  करते  रहे   और  75  साल  की  उम्र   के  बाद  दक्षिण  अफ्रीका  के  राष्ट्रपति  बने   l
   इसी  प्रकार  भारतीय  संस्कृति के   प्रसिद्ध  संवाहक   गोस्वामी  तुलसीदास  जी  ने   भी  90  वर्ष  की  उम  में  रामचरितमानस   को  लिखना  प्रारंभ  कर    दिया  था   l
  जिन्दगी  को  बेहतर  बनाने  की  संभावना  सदैव  होती  है ,  बस , हमें  इस  और  बढ़ने  की  जरुरत  है   l 

15 October 2017

WISDOM ------ शिक्षा एक शक्ति है उसका सदुपयोग करें l

 आज  ज्ञान - विज्ञान  में  अग्रणी  रूस  की  प्रमुख  शक्ति  वहां  के  प्रत्येक  नागरिक  का  शिक्षित  होना  है  l   1920  से  पूर्व   रूस  में  निरक्षरता  की  स्थिति  भयावह  थी  , किन्तु  राज्य  सत्ता  का  हस्तांतरण  होते  ही   निरक्षरता  को   मिटाने  के  लिए  अथक  प्रयत्न  किये  गए  l  देश  के  कोने - कोने  में  निरक्षरता  उन्मूलन  केंद्र  खोले  गए  l  हर  शिक्षित  व्यक्ति  ने  प्रत्येक  अनपढ़  को  पढ़ाने - लिखाने  का  संकल्प  लिया  l  उस  वक्त  वहां  के  70  प्रतिशत  पुरुष  और   90  प्रतिशत  महिलाएं  अशिक्षित  थीं  l   71  जन जातियों  में  से  40  जातियां  ऐसी  थीं  जिनकी  कोई  भाषा  नहीं  थी  ,  उन्हें  शिक्षित  करना  बहुत  बड़ी  जिम्मेदारी  थी  l   इन  लोगों  के  लिए  भाषा  का  निर्माण  हुआ , जगह - जगह  स्कूल  खोले  गए  l  करोड़ों  की  संख्या  में  प्रौढ़  अशिक्षितों  को  पढ़ाने  के  लिए     स्वयं  सेवी  शिक्षकों  को   भावनात्मक  स्तर  पर  तैयार  किया  गया  l प्रत्येक   साक्षर  एक  निरक्षर  को  पढ़ाये ----- यह  रुसी साक्षरता अभियान  का  प्रमुख  नारा  था  , जिसे  पूर्ण  करना  प्रत्येक  नागरिक  का  राष्ट्रीय  दायित्व  था  l  इसके  परिणाम स्वरुप  192 0  से  1940  के  मध्य   पांच  करोड़  अनपढ़ों  को  साक्षर  बना  दिया   l   1970  तक   99.8  प्रतिशत  पुरुष  और   99 .7  प्रतिशत  महिलाएं  शिक्षित  हो   गईं  l
  लेनिन  का  नारा  था ---- पढ़ो   !  पढ़ो  !  पढ़ो  !   इसे  वहां  के  नागरिकों  ने  सत्य  करके  दिखाया  l                                                                                                                                       

14 October 2017

WISDOM -

 '   इस  संसार  में  कोई  अजेय  नहीं  है  l  काल  किसी  को  क्षमा  नहीं  करता  l  दुराचारी  चाहे  कितना  बलवान , शक्तिवान  क्यों  न  हो  , एक  दिन  उसका  दर्दनाक  अंत  होना  सुनिश्चित  है   l  शक्ति  का  दंभ  भी  तब  तक  है  , जब  तक  पुण्य  शेष  हैं  l  पुण्य  के  क्षीण  हो  जाने  पर   सारा   दंभ   गुब्बारे  की  हवा  की  तरह    निकल  जाता  है   और    बच   जाता   शक्ति  के बल  पर   किया  गया  घोर  पाप   l  मनुष्य  अपने  ही  नीच  कर्मों  द्वारा  अपने   ही  पुण्य  भंडार  का  क्षरण  कर  लेता  है   l '

13 October 2017

महात्मा गाँधी विचार देने से ज्यादा विचारों को जीवन में उतारने के हिमायती थे l

   बीस   वर्ष  के   दक्षिण  अफ्रीकी  प्रवास  के  बाद   वे  हिन्दुस्तान  लौटे    l  अपने  गुरु  गोपालकृष्ण  गोखले  की  सलाह  पर   वे  वर्ष  भर  राजनीतिक  रूप  से  मौन  रहे   और  उन्होंने  सम्पूर्ण  भारत  का  भ्रमण  किया  l   इस  यात्रा  के  जरिए  वे  समाज  के  अंतिम  जन  तक  पहुंचना  चाहते  थे  और  पहुंचे  भी  l
  उनका  पहला  राजनीतिक  भाषण  उस  समय  हुआ  जब  1916  में  बनारस  हिन्दू  विश्वविद्यालय  के  शिलान्यास  कार्यक्रम  में   देश  भर  से  बड़े - बड़े  लोगों  को  बुलाया  गया  था ,  जिनमे  बड़े - बड़े  राज्यों  के  महाराज , अन्य  रियासतों  के  राजा , बड़े  व्यापारी   व  राजनीतिज्ञ  शामिल  थे  l  इस  कार्यक्रम  में  वायसराय  को  भी  बुलाया  गया था  l  गांधीजी  को  भी  इस  कार्यक्रम  में  सम्मिलित  होने  का   न्योता  मिला  था  l
  जब  गांधीजी  के  सामने   उपस्थित  व्यक्तियों  को  संबोधित  करने  की  बारी  आई   तो  उन्होंने  कहा  ---- " मुझे  यहाँ  आने  में  देर  लगी  , समय  पर  नहीं  पहुँच  पाया  क्योंकि  शहर  की  इतनी  किलेबंदी  की  गई  थी  कि   सुरक्षा  की  वजह  से   यहाँ  पहुँचने  में  देर  लगी  l  "    उन्होंने  सवाल  उठाया  कि  यदि  देश  का  वायसराय  जो  संप्रभु  है  ,  उसको  अपनी  प्रजा  से  इतना   डर   लगता  है    तो  इससे  अच्छा  है  कि  वह   न  रहे  l  फिर  उन्होंने   सभा  में   भव्यता  के  साथ  पहुंचे  राजा - महाराजाओं  को  आड़े  हाथों  लिया   और  कहा  कि  , ' आप  तो  जनता  की  तिजोरी  में   जितना  सोना - चांदी  और  आभूषण  है  , उसे  अपने  शरीर  पर  लाद  कर  चले  आये  हैं   l  आखिर  यह  किसकी  कमाई  है  ?
 उनके  प्रश्न  जन सामान्य  के  प्रश्न  थे   l  

12 October 2017

विचार क्रान्ति से ही सम्पूर्ण क्रांति संभव ------ लोकनायक जयप्रकाश नारायण

  निष्ठावान - राष्ट्रवादी   जयप्रकाश  नारायण  अपने  छात्र  जीवन  से  एक   जुझारू  स्वाधीनता  सेनानी  थे   l  मौलाना  अबुल  कलाम  आजाद  की   इन  पंक्तियों  ने  उनके  अंतर्मन  में  क्रांति  की  ज्वाला  भड़का  दी ----  " नौजवानों  !  अंग्रेजी  शिक्षा  का  त्याग  करो   और  मैदान  में  आकर   ब्रिटिश  हुकूमत  की  ढहती  दीवारों  को  धराशायी  करो  और  ऐसे  हिंदुस्तान  का  निर्माण  करो  ,  जो  सारे  आलम  में  खुशबू  पैदा  करे  l  "
            राष्ट्रीय  स्वाधीनता  के  लिए  उन्होंने  हर  कष्ट  सहे ,  अनेकों  बार  जेल  गए  l  इस  कार्य  में  बराबर  की  भागीदारी  निभाई  उनकी  पत्नी  प्रभावती  देवी  ने  l    गांधीजी  के  लिए  प्रभावती  अपनी  लाड़ली  बेटी  की  तरह  थीं   l  उनके  विवाह  में  गांधीजी  ने  अभिभावक  की  भूमिका  निभाई  थी  l  1947   में  देश  की  आजादी  के  बाद   उन्हें  सरकार  में  गृह राज्य मंत्री  बनाये  जाने  का  प्रस्ताव  था  ,  परन्तु  उन्होंने  स्पष्ट  रूप  से  मना  कर  दिया  l 
  परम पूज्य  गुरुदेव  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य  जी  ने  कहा  था ---- " इस  महान  लोकनायक  का  साथ  देने  के  लिए   आध्यात्मिक  शक्तियां  भी   कटिबद्ध  एवं  संकल्पित  हैं   l "   जब  8  अक्टूबर  1979  को  उनका  देहावसान  हुआ   तब   गुरुदेव  ने    कहा ----- " मैं  यह  स्पष्ट  कहता  हूँ  , भारत  देश  जयप्रकाश  जी  को   त्याग - तपस्या  के  प्रतीक  और   जनहित  के  लिए  सर्वस्व  निछावर   करने  वाले   महान  योद्धा    तथा  जन भावना  को   स्वर  देने  वाले   विचार  क्रांति  के   महावीर  की  तरह   हमेशा  याद  रखेगा   l "   उनका  सम्पूर्ण  जीवन  जैसे  पुरातन  शास्त्रों   की  पवित्रता  की   सर्वाधिक  सटीक  और  सामयिक  व्याख्या  थी   l  

11 October 2017

WISDOM ------- जनचेतना ---- जन - सेना

  बात  उन  दिनों  की  है  जब  भारत  में  अंग्रेजों  का  शासन  था  l  प्रथम  विश्व युद्ध  जोरों  पर  था   और  अंग्रेजों  को  लड़ने  के  लिए  लाखों  सैनिकों  की  जरुरत  थी  l   उन्होंने  भारतीय  राजाओं  से   सेना  लेने  का  निश्चय  किया  l  इस  सिलसिले  में  उनका  प्रतिनिधि  ' रेजिडेंट '  जैसलमेर   राज्य  में  आया  l  वह  यहाँ  के  महाराजा  जवाहर  सिंह  के  नाम  वायसराय  का  पात्र  भी  लाया  था  , जिसमे  जैसलमेर  की  सेना  को   ब्रिटिश  सेना  में  शामिल  करने  का  अनुरोध  था  l  राजा  ने  रेजिडेंट  का  भव्य  स्वागत  किया  और  कहा  कि  जैसलमेर  राज्य  में  कोई  नियमित  सेना  नहीं  है , अत:  वे  उनकी  सेवा  में  सैनिक  देने  में  असमर्थ
 हैं  l   रेजिडेंट  हंसा  और  बोला  आप  हमें  बेवकूफ  नहीं  बना  सकते  ,  बिना  सेना  के  कोई  शासन  चलता  है  क्या  ? 
   राजा  ने  कहा ---- हमारी  आर्थिक  स्थिति  ऐसी  नहीं  है  कि  हम  सेना  का  बोझ  उठा  सकें  l  हमारी  जनता  ही  हमारी  सेना  है  ,  इसके  आत्मबल  से  ही  हम  हर  तरह  के  खतरे  का  मुकाबला  कर  सकते  हैं   l    अंग्रेज  रेजिडेंट  को  इन   बातों   का  जरा  भी  विश्वास  नहीं  हुआ ,  उसने  कहा  कि   यहाँ  की  आबादी  के  हिसाब  से   पांच  हजार  सैनिक  तो  साथ  ले  ही  जाने  हैं   l  महाराजा  ने  भी  समझा  कि  अब  बातों  से  काम  न  चलेगा  कुछ  करना  पड़ेगा  l  अत:  उन्होंने  कहा ,--- ठीक  है  l  कल  सुबह  आप  मेरी  सेना  देख  लेना  l  उसी   दिन  राजा  ने  अपने  घुड़सवार ,  ऊंट सवार  गाँव - गाँव  में  भेज  दिए  और  यह  कहलवा  दिया  कि   15  से  45  वर्ष  के  सभी  आदमी   सूरज  उगने  से  पहले  जैसलमेर  पहुँच  जाएँ   और  जिसके  पास  जो  भी  हथियार   है , साथ  लेता   आये  और   घोडा , ऊंट , बैलगाड़ी   जो  भी  वाहन  उपलब्ध  हो , लेकर  आये  l
  आदेश  हवा  के  साथ  सारे  राज्य  में   फैल   गया  l  खेत , खलिहान , मजदूर,  पत्थर  तोड़ता ,  गड्ढे  खोदता ---- जो  जैसा  था   तुरंत  शहर  की  ओर  रवाना  हो  गया   l
 अंग्रेज  रेजिडेंट  अपने  शयनकक्ष  में  सोया  हुआ  था  l    ऊंट ,  घोड़े  , बैलों  की  आवाजें ,  कण  फोड़  देने  वाला  शोर  सुनकर  उसकी  नींद  उचट  गई  , वह  उठ  कर  छत  पर  गया  l  वहां  राजा  पहले  से  ही  बैठे  थे  ,  उन्होंने  कहा  ,  आइये ,  देखो   यह  है  हमारी  सेना  l  रेजिडेंट  आँखे  फाड़  कर  देख  रहा  था  --- आसमान  तक  छाई  हुई  धूल  l   लोग  कमर  कसे    लाठी , डंडे ,  भाले ,  बंदूक,  तलवार , तीरकमान  लिए   आ  रहे  हैं  l  ऊंट , घोड़े , बैलगाड़ियों  का  हुजूम  हैं   l   महाराजा  ने  कहा  --- ये  है  हमारी  सेना ,  एक  रात  में  ही   ये  सभी  आ  पहुंचे  हैं  l   हम  सबको  अपनी  मिटटी  से  प्रेम  है  l  हमारी  स्वतंत्रता  पर  जब  आंच  आती  है  , तब  सारी  जनता  बलिदान  के  लिए  तुरंत  तैयार   है  l  जहाँ  जनता  बलिदान  देने  को  तैयार  हो  वहां  कौन  सा  खतरा  टिक  सकता  है   l   
  रेजिडेंट  आश्चर्य चकित  होकर  देखता  रह  गया   l  उसने  कहा   ऐसी  जन चेतना  जब   पूरे  भारत  की  राष्ट्रिय  चेतना  बन  जाएगी  तो  कोई  भी  विदेशी  ताकत   इसे  अपनी  गिरफ्त  में  नहीं  रख  सकेगी  और  तब  भारत  विश्व  का  सिरमौर  होगा  l